कहीं कुछ भूल तो नहीं रहे आप


आज बच्चों का रिज़ल्ट आया है। रिपोर्ट कार्ड देखकर एक मां अपने बच्चे को डांट-फटकार लगा रही थी। दरअसल बच्चा पिछले साल की तरह इस साल क्लास में फस्र्ट नहीं आया। तीसरी कक्षा में पढऩे वाले इस नन्ही उम्र के बच्चे के दिमाग में यह बात गहरे तक बैठ गई है कि नंबर वन पर पहुंचने के बाद भी उसे, उस पर बने रहने की लड़ाई हमेशा करनी है।
'नंबर वन पर पहुंचकर लोगों की नज़र में नंबर वन बने रहना बहुत मुश्किल है।Ó बहुत बार सुना और कइयों बार सउदाहरण देखा। हैं आस-पास बहुत से लोग, जिन्होंने आधी जि़ंदगी नंबर वन पर पहुंचने की जद्दोजहद में लगा दी और बची जि़ंदगी उस पर बने रहने की मशक्कत में गुजार रहे हैं। मगर वे कभी इस 'नंबर वन पर बने रहनेÓ का सार समझने की कोशिश नहीं करते।
जानते सभी हैं, मगर मानते कुछ ही लोग हैं कि कोई भी व्यक्ति अकेले कोई सफलता हासिल नहीं करता, उस सफलता को पाने में कई लोग उसके पीछे होते हैं। जब आप अपने श्रेष्ठ कामों के लिए स्टेज पर खड़े होकर मैडल ले रहे होते हैं, तो उन लोगों को कभी न भूल जाएं, जिन्होंने आपको मंजिल तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। वास्तव में उन्हीं लोगों की नज़र में नंबर वन रहना ही आपके लिए नंबर वन पर बने रहना है।
शायद किसी की पीठ थपथपाने की वजह से ही आप अपने अंदर उस नंबर वन को ढूंढ पाए। प्रतियोगी परीक्षा देने जा रहे थे और गाड़ी में पेट्रोल खत्म। आपके एक फोन पर १० मिनट के अंदर दोस्त बाहर अपनी गाड़ी लेकर हॉर्न बजा रहा था। परीक्षा में आप उत्तीर्ण हो गए, अखबार में फोटो भी छप गई। मगर क्या उस दोस्त को गले लगाने पहुंचे, जिसने उस दिन आपकी मदद की?
जब तक आप उन सभी लोगों की नजर में नंबर वन रहेंगे, मानकर चलिए आप जि़ंदगी के हर मुकाम पर अव्वल रहेंगे।
कुछ दिनों पहले की बात है, पुणे के एक मशहूर उद्योगपति के ड्राइवर का निधन हो गया। ड्राइवर ने अपने जीवन के 30 साल उद्योगपति को समर्पित किए। जिस समय ड्राइवर की मृत्यु हुई, वे मुंबई में कुछ ज़रूरी मीटिंग्स में व्यस्त थे। निधन की खबर लगते ही उन्होंने बिना कुछ सोचे सारी मीटिंग्स कैंसल की और सीधे ड्राइवर के परिवार को फोन लगाकर दाह संस्कार तक उनका इंतज़ार करने का निवेदन किया। अगले ही पलों में उद्योगपति अपने ड्राइवर की अंतेयष्टि में मौजूद थे।
ये अंतयेष्टि एक मामूली ड्राइवर की जरूर थी, मगर उनकी अंतिम यात्रा आम लोगों से हटकर थी। दरअसल उद्योगपति की इच्छा थी कि वे अपने सालों पुराने वफादार कर्मचारी को उसी कार से विदा करें, जिसमें बैठकर वे अब तक कई सफलताएं अर्जित कर चुके थे। फूलों से सुसज्जित कार में ड्राइवर के मृत शरीर को विश्रामघाट तक ले जाया गया और इस बार स्वयं उद्योगपति उस कार को ड्राइव कर रहे थे।
जब किसी ने उनसे यह सब करने के पीछे का कारण जानना चाहा, तो वे बोले - पैसे हर कोई कमाता है, इसमें कोई असाधारण बात नहीं है, मगर हमें हमेशा उन लोगों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए, जिन्होंने हमारी सफलता में योगदान दिया। यही वह भरोसा है, जिसमें हम पले-बढ़े हैं, जिनकी वजह से मैंने यह किया।
उद्योगपति ने जि़ंदगीभर के लिए उस ड्राइवर जैसे कई लोगों के परिवारवालों के दिल में नंबर वन की जगह बना ली, जहां से कोई उन्हें हटा नहीं सकता।
इसके साथ ही जरूरी है कि आप क्या थे, उस अहसास को कभी न भूलें। धीरू भाई अंबानी ये बात कभी नहीं भूले थे कि वे कभी पेट्रोल पंप पर काम करते थे या शाहरुख खान आज भी उस दोस्त के प्रति आभारी हैं, जिनके दिए रुपयों से वे फिल्मसिटी आना-जाना करते थे।
काश, यह बात उस मां को भी समझ आ जाए कि अगर बच्चे के दादा रोज़ उसे ट्यूशन समय पर न छोड़ते तो बच्चा अच्छी तरह पढ़ाई न कर पाता और अगर दादी उसके खाने-पीने का ध्यान न रखतीं, तो वह स्वयं कभी निश्चिंत होकर ऑफिस न जा पाती। दादा-दादी के प्रति बच्चे की कृतज्ञता ही उसके लिए नंबर वन पर बने रहने की उपलब्धि है।
नंबर वन पर बने रहने का मतलब है आप क्या थे, उसे याद रखना और जिनकी वजह से थे, उनके प्रति हमेशा नतमस्तक रहना।

- प्रिया 'लय'

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