अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो


हर सुबह की तरह आज भी हाथ जोड़कर ईश्वर को धन्यवाद दिया। साथ में एक दुआ भी मांगी, 'हे प्रभु, अगले हर जनम में मुझे बेटी ही बनाकर भेजना, ताकि पिता के दिल के करीब रहूं और मां के मर्म को समझूं। बस किस्मत में उनसे बिछोह मत लिखना।Ó दुआ मांगते-मांगते मेरी बाईं आंख से पहला आंसू गिरा और मुझे किसी की कही बात याद आ गई- जब कोई खुशी में रोता है, तो उसकी दाईं आंख से पहला आंसू निकलता है और जब कोई दुख में रोता है, तो उसकी बाईं आंख से पहला आंसू गिरता है। आज मन दुखी था, किसी के लिए।
कुछ दिनों पहले अचानक एक दुखद खबर मिली, मेरी एक दोस्त से उसकी मां का आंचल छिन गया। एक साल पहले ही उसने अपने पिता को खो दिया था और अब मां का जाना, उसे कैसी स्थिति में ले आया होगा, इसका मैं अनुमान भी नहीं लगा सकती। मैंने हर स्थिति से उसे लड़ते देखा है। पिता के जाने के बाद वह घर में अपनी बहन-भाई और मां के लिए घर का मुखिया बन गई थी। एक पुरुष की तरह हर जिम्मेदारियों का निर्वहन उसने अकेले किया। घर-ऑफिस के बीच संतुलन बनाकर जैसे-तैसे घर की गाड़ी को पटरी पर लेकर आई ही थी, कि मां के दिनोंदिन बिगड़ते स्वास्थ्य ने उसे एक बार फिर हिला दिया। अब तो बस उसे अपने भाई-बहनों के लिए दोहरी भूमिकाएं निभानी हैं। उसे मुखिया बनकर घर को मजबूत आधार तो देना ही है, मां की तरह भाई-बहनों को ममता भी देनी है।
जानती हूं कि बेटा आंखों का तारा होता है, लेकिन तारे तो हजारों में होते हैं। बेटी चांदनी होती है, जो अकेले ही अंधेरी दुनिया को रोशन करती है। 
अर्जी तो लगा दी है, बस कुबूल हो, ऐसी दुआ कीजिएगा। मगर जरूरी नहीं कि मेरी तरह हर बेटी की इच्छा अगले जनम में बेटी ही बनकर आने की हो। हो सकता है वह इस जनम की मुश्किलों से अगले जनम में बेटी ना बनकर आना चाहे, बेटा बनना चाहे। कोई बिटिया, आखिर क्यों ऐसी दुआएं मांगेगी? शायद इसलिए, क्योंकि वह परेशान हो चुकी है, एक लड़की के रूप में इस दुनिया, समाज और कभी अपने ही लोगों से मिली तकलीफों से। बेटी बनकर उसने जो इस जनम में सहा, उसकी वेदना ने उसे दाता से अगले जन्मों में मनुष्य के रूप में बेटा बनने की गुजारिश की हो। शायद वह समझ चुकी है कि मौत तो नाम से बदनाम है, वरना तकलीफ तो जि़ंदगी ही ज्यादा देती है। बनिस्बत, वह जानती है कि स्त्री होना गर्व की बात है। एक स्त्री ही सृष्टि को चलाती है। वह स्त्री बनकर हर दायित्व को मजबूती से निभाती है। जिस तरह भाई की कलाई बहन के बिना अधूरी है, उसी तरह जीवनसंगिनी के साथ ही पुरुष की जि़ंदगी पूरी है। मां की दी सीख कि, 'किसी को गम देने में हमें खुशी तो मिल सकती है, मगर किसी को खुशी देने में हमें कभी गम नहीं मिलेगा।Ó बेटी मां बनकर भी याद रखती है, और वंश-दर-वंश उस सीख को आगे बढ़ाती रहती है।  
कैसे कहूं उस दोस्त से कि संभलने की कोशिश कर। माता-पिता का जाना तो विधाता ने विधान में लिख दिया था, तुझे उन्होंने जरिया बनाया, ताकि तू अपनों का संबल बन सके, उन्हें बिखरने न दे। ईश्वर जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, भरोसा करते हैं, उसी के कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ डालते हैं। यानी तू तो ईश्वर की सबसे प्रिय हुई न, हम सबसे ज्यादा। उन्होंने तुझे पिता का साया भी बना दिया और मां की छाया भी।
ईश्वर ने बेटे की तुलना में बेटी पर ही भरोसा किया, उसकी शक्तियों पर विश्वास किया। और यह मुझसे बेहतर कोई नहीं जान सकता। मैं अपनी दोस्त के लिए बस यही दुआ करती हूं कि ईश्वर उसकी सारी समस्याओं को रेत पर लिख दे, ताकि जल्दी ही हवा का झोंका आकर उसे मिटा दे और उसकी खुशियों को पत्थर पर लिख जाए, ताकि हवा तो क्या बारिश भी उसे ना मिटा सके।

- प्रिया 'लय'

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