36 gun ya 36 ka ankdha
कुंडली के बजाए आदतों का मिलान हो पाता
अक्सर ही विवाह के प्रस्ताव आने पर लड़के और लड़की के घरवाले उनकी कुंडलियों का मिलान करते हैं। जिसके भी 36 के आस-पास के गुण मिल जाते, उनकी जोडिय़ों को पंडित की हरी झंडी मिल जाती और जिसके पूरे 36 गुण मिल जाते, उसे तो पंडितजी की तरफ से भगवान द्वारा बनाई गई श्रेष्ठ जोड़ी का खिताब ही मिल जाता। मगर क्या सचमुच कुंडली में मिलने वाले 36 गुण इस बात की पुष्टि करते हैं कि अमुक जोड़ी की बनेगी ही बनेगी?
सालभर पहले मेरी दोस्त की शादी हुई- अरेंज मैरिज। पंडित ने बिना लाग लपेट के दोनों कुंडलियों के 33 गुणों के मिलान की बात कही थी। मगर 33 तो क्या दोनों की आदतों में कुल तीन बातें भी एक सी नज़र नहीं आईं। एक को बैगन का भर्ता बहुत पसंद है, तो दूसरे को बैगन से दाढ़ में दर्द होने लगता है। एक को सबसे मिलना-जुलना, घूमना, मूवीज़ देखना पसंद है, तो दूसरा एकदम शांतप्रिय, अकेला रहने वाला, अपनी दुनिया में ही खुश, संतुष्ट इंसान हैं। मगर कहीं न कहीं ये बात सहेली को मायूस कर जाती है। फिर भी ऐसा नहीं है कि इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा होता हो, बल्कि दोनों किसी भी बात के लिए एक-दूसरे को दोष नहीं देते। इस तरह पति खुद को पत्नी के अनुरूप ढालने की कोशिश में लगा है और कहीं न कहीं पत्नी खुद को अपने पति के अनुसार बदलने में लगी है। मगर क्या वे समझ पाएंगे कि किसी इंसान का प्राकृतिक स्वभाव कभी नहीं बदल सकता। और अगर बदला गया, तो वह नैचुरल नहीं रह गया, आर्टिफिशल हो गया न।
दोनों एक-दूसरे से विपरीत हैं, फिर कहां दोनों के 36 गुण मिले, कोई जाकर बताए कुंडली मिलान के पीछे पडऩे वालों को।
अक्सर जोड़े की शिकायत होती है कि 'हमारी आदतें नहीं मिलतीं। एक इस दिशा में जाता है, तो दूसरा उस दिशा में। कुंडलियां मिलने के बाद भी यह हाल है।Ó कुंडली मानो लाइफटाइम गारंटी कार्ड हो गई।
कोई भी रिश्ता कुंडली से बंधा नहीं रह सकता, बल्कि रिश्ते की डोर तब कम होती है, जब इंसान गलतफहमियों में पैदा होने वाले सवालों का जवाब खुद ही बना लेता है।
कुंडली न मिल पाने के कारण बेटी ३५ साल से घर में बैठी है। कभी फलां दोष है, तो कभी फलां कमी। जहां गुण मिलते हैं, वहां बेटी को लड़के का स्वभाव नहीं जमता और जहां स्वभाव मिल जाता है, वहां कुंडली बीच में कुंडली मारकर बैठ जाती है।
हालांकि ये सर्वविदित है कि कोई भी व्यक्ति परपेक्ट नहीं होता, मगर विवाह में परफेक्शन नहीं, सेटिसफेक्शन जरूरी है भई।
लड़कियों का गोरापन और लड़कों के बैंक बैलेंस से कहीं हटकर जरूरी है- कि जि़ंदगी में कभी उसे पसंद न किया जाए, जो दुनिया में बहुत सुंदर है, बल्कि उसे जि़ंदगी का हिस्सा बनाया जाए, जिसके कारण आपकी दुनिया सुंदर है। क्या ये बात कहीं कुंडली में मिलती है, अगर हां, तो फिर इन्हीं बातों का कुंडलियों में मिलान करके क्यों न देखा जाए।
ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि शादी के लिए लड़के और लड़की की कुुंडली के 36 गुणों के मिलान की बजाए उन्हें आमने-सामने बैठाकर ३६ आदतों का मिलान हो जाए, तो शायद दोनों को एक-दूसरे की खुशी के लिए खुद को बदलने की जरूरत न पड़े। एक रिश्ता बनाना रेत में रेत से लिखने जैसा ही है, वहीं रिश्ता निभाना पानी में पानी से लिखने जैसा। ये बातें कुंडली में नहीं मिलतीं।
- प्रिया 'लय'
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